ज़िंदगी की इस जंग में…

ज़िंदगी की इस जंग में,
हार मुझे मंजूर नहीं।
कैद की जो परिभाषा है,
वो कमजोरी मुझे मंजूर नहीं।

मैं जीतूँ या हारूँ इस जंग में,
किसी का सहकार मुझे मंजूर नहीं।
लड़ने दो खुद को अकेले ही,
ये शस्त्र का उपहार मुझे मंजूर नहीं।

चाहता हूँ हार मान लेना भी,मगर…
मेरी हार पर जश्न मुझे मंजूर नहीं।
'यारा' भले मिट जाए वजूद मेरा,
इस जंग में कश्मकश मुझे मंजूर नहीं।

~ याज्ञिक रावल "यारा"

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યાજ્ઞિક રાવલ
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